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Brent क्रूड की बढ़ती कीमत भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकती है? 03.05.2022

इस साप्ताहिक समीक्षा में, हम भारत की मुद्रास्फीति, शेयर बाजार और GDP पर तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का विश्लेषण करेंगे।

विषय-वस्तु:

  • क्या भारत का तेल आयात भारतीय शेयर बाजार और GDP को नुकसान पहुंचा सकता है?
  • Nifty 50 पर असर
  • तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय तेल कंपनियों को कैसे फायदा पहुँच सकता है?

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क्या भारत का तेल आयात भारतीय शेयर बाजार और GDP को नुकसान पहुंचा सकता है?

तेल की बढ़ती कीमतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। चूंकि भारत एक शुद्ध तेल आयातक देश है, तेल की ऊंची कीमतों के परिणामस्वरूप देश की उच्च तेल आयात लागत बढ़ी है। भारत का व्यापार संतुलन (बैलेंस ऑफ़ ट्रेड) इसके कारण कम होने की संभावना है, जिससे GDP प्रभावित होगा। PPAC के अनुसार, भारत ने 2021-2022 में 212.2 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया। यह 2019-2020 में 101.4 अरब डॉलर से 196.5 मिलियन टन की वृद्धि है। वैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष ने तेल की कीमतों में वृद्धि को बढ़ावा दिया, और युद्द ने, बदले में, देश की मुद्रास्फीति में बढ़ोत्तरी की। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और विकास की क्षमता में सुधार करने के लिए मौद्रिक सख्ती और संरचनात्मक कमजोरियों पर सम्बोधित करने के उपायों की आवश्यकता है।

Brent क्रूड ऑयल चार्ट - Olymp Trade - विशेषज्ञ समीक्षा – 03.05.2022
चित्र 1. Brent क्रूड ऑयल चार्ट

Nifty 50 पर असर

तेल की बढ़ती कीमतों से Nifty 50 को नुकसान हो सकता है।

समग्र उच्च उत्पादन लागत, बढ़ती मुद्रास्फीति और उपभोक्ता खर्च में गिरावट के कारण तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय सकल घरेलू उत्पाद और शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। कॉरपोरेट आय और लाभप्रदता में भी गिरावट आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बनेगा। हम उम्मीद करते हैं कि Nifty50 में आने वाले हफ़्तों में कमजोर प्रदर्शन होगा। नीचे की ओर गिरते हुए, 16,500-16,850 का स्तर महत्वपूर्ण होगा, और अधिक गिरावट के मामले में, Nifty50 15,650-16,000 की सीमा तक नीचे गिर सकता है।

Nifty 50 इंडेक्स ग्राफ - Olymp Trade - विशेषज्ञ समीक्षा - 03.05.2022
चित्र 2. Nifty 50 इंडेक्स: भारत

तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय तेल कंपनियों को कैसे फायदा हो सकता है?

पूरे भारत में ईंधन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उपभोक्ता उत्पाद की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण कच्चा तेल है। इस प्रक्रिया से सबसे अधिक फायदा पाने वाली कंपनियों में से एक है ONGC, या ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन भारत में सबसे बड़ा सरकारी-स्वामित्व वाला तेल निगम होने के नाते, जो तेल और गैस की खोज और उत्पादन में कारोबार करता है, यह कंपनी भारत के कच्चे तेल का लगभग 70% और देश की प्राकृतिक गैस का 84% उत्पादन करती है। वर्तमान में, रूस में ONGC की तीन परियोजनाओं में, Sakhalin में 20%, Vankorneft में 26% और Imperial में 100% हिस्सेदारी है।

हाल ही में, ONGC ने कहा कि वह किसी भी रूसी परियोजना में संचालन के प्रभावित होने की उम्मीद नहीं कर रही थी और रूसी रूबल के अवमूल्यन से इसके लाभ में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, कंपनी ने उल्लेख किया था कि उसे रूसी तेल क्षेत्रों से अपने हिस्से के कच्चे तेल को बेचने में कोई चुनौती नहीं है।

ONGC एक अपट्रेंड में है और भविष्य में इसके ऊपर जाने की संभावना है। वर्तमान में, यह 160.00 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के पास कारोबार कर रहा है और आगामी हफ्तों में 180.00 तक पहुंच सकता है।

चित्र 3. ONGC, भारत

जोखिम चेतावनी: लेख की सामग्री में निवेश की सलाह निहित नहीं है और आप अपनी ट्रेडिंग गतिविधि और/या ट्रेडिंग के परिणामों के लिए पूरी तरह से स्वयं जिम्मेदार हैं।

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