आधारभूत विश्लेषण

भारत का आर्थिक संकट में ट्रेडिंग

अनिश्चित काल में ट्रेडिंग के लिए रणनीतियाँ


खुशखबरी! आप वर्तमान वित्तीय संकट के बावजूद धन अर्जित कर सकते हैं। हालांकि दुनिया बुरी खबर से परेशान है, बाजार अभी भी कार्यशील है और अब बाजार की अस्थिरता का पूरा फायदा उठाने का समय है।

 

भारत में आर्थिक संकट क्यों है?

यदि आप समाचार देख रहे हैं और आर्थिक उथल-पुथल को फॉलो कर रहे हैं, तो आप अपनी वित्तीय संभावनाओं की भविष्य पर कुछ निराश हो सकते हैं। दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, Covid-19 महामारी से दुनिया भर में शटडाउन और क्वारेन्टीन के कारण भारत को कठिन आर्थिक समय का सामना करना पड़ रहा है।

जबकि यह सब कुछ परेशान करने वाली खबर है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप उन अवसरों पर विचार करें जो उन लोगों के लिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं जो वर्तमान दौर को चुनौती देने के लिए तैयार हैं और एक बार दुनिया फिर से इस झटके से उभर कर बाहर आ जाएगी और यह होने से पहले आप शीर्ष पर पहुँच चुके होंगे।

आइए हम आपको भारतीय अर्थव्यवस्था की गिरावट के आसपास के बुनियादी कुछ तथ्यों से अवगत कराते हैं और फिर दिखाते हैं कि आप न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि अपने निवेश लक्ष्यों और सपनों तक पहुंचने के लिए इस संकट से उभर सकते हैं।

 

आर्थिक संकट कैसे हुआ और भारत ने कैसे प्रतिक्रिया दिया

घातक तूफान

वर्तमान आर्थिक संकट कोरोना वायरस की वजह से ही नहीं आया, बल्कि वायरस का एक संयोजन और वायरस की वैश्विक प्रतिक्रिया है।

एक परिस्थिति ने दूसरे को जन्म दिया है और वैश्विक नेताओं द्वारा चुने गए विकल्पों के साथ मिलकर अन्य समस्याएं उभर गई।

इसका मतलब है कि नीति निर्माता अपने पिछले निर्णय के प्रभावों को सामना करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। शुरुआत पर्यटन और यात्रा प्रतिबंधों के साथ की गई थी। जबकि ये उपाय देशों को वायरस से दूर रखने में सहायक होते थे, लेकिन पर्यटन पर निर्भर प्रमुख उद्योगों को भी नष्ट कर दिया। इस क्षेत्र से भारत को काफी लाभ होता है।

बेशक, यात्रा प्रतिबंध ने वायरस के प्रसार को रोक नहीं पाया और इसलिए शटडाउन और क्वरेन्टीन किए गए। एक बार फिर, उद्योग और उत्पादन के पूरे क्षेत्रों को बंद करने का आर्थिक परिणाम, न केवल भारत पर लेकिन पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी रहा।

इससे विशेषकर संयुक्त राज्य उपभोक्ताओं से वस्तुओं और सेवाओं की मांग में भारी कमी आई है, जो वैश्विक उपभोक्तावाद की आधार हैं। जब संयुक्त राज्य ने कई सामानों को खरीदना बंद कर दिया, इसने दुनिया के लगभग हर देश को किसी न किसी तरह से प्रभावित किया।

मांग में कमी की वजह से, एक देश से दूसरे और देश के भीतर पैसों की चलन में कमी है। इसलिए, हम लेनदेन में कमी और लेनदेन करने वाले उन श्रमिकों की कम आवश्यकता होते हुए देख रहे हैं।

यहां कुछ अच्छे उदाहरण दिए गए हैं: कोई व्यवसाय ऐसा नहीं है जो मौजूदा समय में क्यों किसी इमारत में स्थान किराए पर लेकर कार्यालय भवन बनाने के लिए श्रमिकों को भुगतान करेगा? जब लोग ज्यादा खरीदारी नहीं कर रहे हैं तो अधिक कपड़ों का उत्पादन क्यों करें?

अन्य समस्याएं सामग्री के उत्पादन के साथ भी होते हैं जो अभी भी मांग में है। वायरस के डर से क्षेत्रों को बंद करने से खाद्य उत्पादन में कमी आई है क्योंकि श्रमिकों को काम करने की अनुमति नहीं थी या डर की वजह से मना किया गया था।

हालांकि, भोजन के मांग में कोई कमी नहीं है क्योंकि वायरस से बीमार होने वाले लोगों की मृत्यु दर न्यूनतम है। लोगों की वही संख्या लेकिन कम भोजन का उत्पादन होने का मतलब है उच्च लागत।

 

सरकार की प्रतिक्रिया से सहायता के विपरीत ज्यादा नुकसान हो सकता है

भारत, जैसे कई अन्य देशों ने संकट को दूर करने के उपायों के साथ प्रतिक्रिया दी है जो कि अर्थव्यवस्था को स्टिमुलेट रखने के लिए पूरे देश में पैसे को (और फलस्वरूप मांग) परिचालित रखने का प्रयास कर रहे हैं।

बैंक के नियमों में बदलाव करना इन उपायों में शामिल है ताकि अधिक पैसे उधार लिए जा सके, केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को कम करना ताकि बैंकों को ऋण देने में अधिक लचीलापन मिल सके और जनता को धन का प्रत्यक्ष भुगतान हो सके।

भारत में, मोदी सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से ऋण अदायगी पर रोक लगाकर, व्यापार पर नए नियमों को विलंबित करके, और यहां तक ​​कि $266 बिलियन अमरीकी डॉलर के एक महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन पैकेज के द्वारा अन्य प्रमुख राष्ट्रों का अनुकरण किया है।

इन उपायों के साथ मुख्य समस्या तीन गुना है।

सबसे पहले, प्रोत्साहन के लिए अधिक धन छापने से मुद्रा का वास्तविक मूल्य कम होता है क्योंकि प्रचलन में अधिक रहकर मुद्रास्फीति का कारण बनता है। हालांकि यह अमेरिका के लिए सही हो सकता है, जिसकी दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और डिफ़ॉल्ट मुद्रा है, यह अन्य देशों के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है क्योंकि उनकी मुद्रा की खरीद क्षमता कम है।

दूसरा, बैंकों में बचत का मूल्य कम हो जाता है क्योंकि जमाकर्ताओं को भुगतान की जाने वाली ब्याज दरें बहुत कम हो जाती है क्योंकि केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में कमी की गई है। तो, बैंक में आपके पैसों के मूल्य में ब्याज कमाने के विपरीत ह्रास आ रही है। साथ ही, बैंकों के बकाया की जोखिम में वृद्धि होती है क्योंकि उधारकर्ताओं के पास ऋण का भुगतान करने की क्षमता कम हो जाती है।

तीसरा, लोगों ने भविष्य की कठिन परिस्थितियों में सहायता हेतु आर्थिक तंगी से उभरने के लिए डर कर अधिक पैसा खर्च करना बंद कर दिया है। यह समस्या को गहराता है क्योंकि वे कम खर्च कर रहे हैं, जो आर्थिक समस्याओं को और अधिक बढ़ाता है।

उदाहरण के लिए: 2020 में जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि अमेरिकी बचत ने अपनी आय का 33% उच्च स्तर को स्पर्श किया है। याद कीजिए कि हमने पहले संयुक्त राज्य के विश्व अर्थव्यवस्था को चलायमान रखने वाले उपभोक्ताओं के बारे में क्या चर्चा की थी। यदि वे खर्च नहीं करते हैं…

 

आशा की किरण – कैसे संकट में प्रवेश करने की अपेक्षा बेहतर तरीके से उभर सकते हैं

आपके लिए सौभाग्य से, आप इसे पढ़ रहे हैं और अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बुरी स्थिति से बाहर निकलने के तरीके सीख रहे हैं। इन सब में उन लोगों के लिए अच्छी खबर है जो परिस्थिति का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।

बीते दशकों में, भारी मात्रा में धन के बिना औसत लोगों के पास बाजारों में ट्रेड करने का साधन या पहुंच नहीं थी। बेशक, जब समय कठिन था, तो उनके पास कम आय होने के कारण आर्थिक मंदी में बाजारों में सहभागी होने के लिए और भी कम संभावना थी।

छोटे निवेशकों के लिए इस संकट के दौरान लाभ का सबसे अच्छा तरीका ट्रेडिंग के माध्यम से है। बाजारों का संचालन बंद नहीं हुआ है और महामारी और उपरोक्त सभी मुद्दों के कारण, ये बाज़ार सामान्य से और अधिक अस्थिर है। यह एक अच्छी बात है।

बहुत सारे वित्तीय साधन हैं जो निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था ध्वस्त नहीं होने वाली है और अंततः “राइट द शिप (परिस्थिति सामान्य)” होगी। यह इस साल या अगले साल नहीं, लेकिन ऐसा निश्चय ही होगा।

जो लोग बाजारों में निवेश करने की स्थिति में खुद को डालते हैं जब बाजार निचले स्तर में होता है वही लोग जब परिस्थिति बदलती है तब सबसे ज़्यादा मुनाफा कमाते हैं। जो लोग अभी मौके का फायदा नहीं उठाते हैं वे मुद्रास्फीति और संकट से उब्जे नतीजों के कारण पैसे खो देंगे।

समाधान यही है कि अब उन क्रियाविधियों के साथ काम करना है जो आपके निवेश स्तर के अनुकूल हैं। सौभाग्य से, आप केवल एक छोटी राशि के साथ स्टॉक, विदेशी मुद्रा, कमोडिटी के ऊपर ऑनलाइन ट्रेड कर सकते हैं। भारत में संचालित Olymp Trade जैसे ब्रोकर आपको $1 की कम राशि के साथ ट्रेड करने की सुविधा प्रदान करता है।

अमेरिकी, ब्रिटिश, या चीनी अर्थव्यवस्थाओं के बारे में आने वाली नई जानकारी के साथ मुद्रा विनिमय में दैनिक उतार और चढ़ाव हो रहे हैं। इस प्रकार की अस्थिरता निवेशकों को ऊपर या निचे की गतिविधि द्वारा लाभ लेने की सुविधा देती है। EUR/USD (यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर) जैसी मुद्रा जोड़ी हर दिन ट्रेडर को भारी लाभ प्रदान कर रहे हैं।

कॉन्ट्रैक्ट्स फ़ॉर डिफरेंस (CFDs) में ट्रेडिंग करके, निवेशक बाजार के दोनों दिशा में मूल्य गतिविधियों के ऊपर मुनाफा कमा सकते हैं। सभी ब्रोकर इस प्रकार के ट्रेड की पेशकश नहीं करते हैं, यही कारण है कि हम Olymp Trade की सिफारिश करते हैं, जो आपको बाजार में बढ़त के साथ साथ नुकसान से भी लाभ प्राप्त करने की सुविधा देता है।

इससे भी बेहतर यह है कि वर्तमान में छोटे निवेशकों के लिए निवेश के व्यापक विकल्प उपलब्ध हैं। अब “छोटी मछली” को समुद्र में तैरने और ब्लू चिप स्टॉक, सोने, चांदी और तेल जैसी कमोडिटी में ट्रेड और यहां तक ​​कि Dow Jones, S&P 500 और Nikkei जैसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में ट्रेड करने से मना किया जा सकता है।

बड़ी कंपनियां इस माहौल और मौजूदा बाजार की स्थिति को पहचानती हैं, यही वजह है कि हाल ही में Apple और Tesla जैसी प्रीमियम कंपनियों ने “स्टॉक स्प्लिट्स” की घोषणा की है।

उनकी प्रेरणा सरल है: मौजूदा स्टॉकहोल्डर को कई शेयर जारी करके उनके स्टॉक की कीमत कम करना। इससे उनके महंगे शेयर के दाम औसत निवेशक के लिए न्यून सीमा के अंदर आया।

 

निष्कर्ष

यदि आप वही करते हैं जो आप हमेशा करते आए हैं, तो आपको वही प्राप्त होता रहेगा जो आपको हमेशा प्राप्त होता रहा है और वर्तमान आर्थिक माहौल में तो और भी कम।

कारण, यदि आप अपने नकदी को बचाए रखते हुए बचत करते हैं क्योंकि आप वर्तमान संकट से चिंतित हैं, तो संकट समाप्त होने पर आपके पास उतनी ही धनराशि होगी। हालांकि, क्योंकि सरकार ने और भी अधिक धन छापना जारी रखा है और कीमतें बढ़ रहे हैं, इसलिए वास्तव में आप द्वारा संचित धन की तुलना में भविष्य में आपके पास कम धन राशि होगी।

समाधान है कि आपके पैसे को इस तरह से निवेश करने की जो आपके नकदी के मुद्रास्फीति/अवमूल्यन को दूर करती है। ट्रेड करना शुरू करें और आप जल्दी से पाएंगे कि आपके निवेश पर लगातार 5-10% मासिक रिटर्न बनाए रखना केवल संभव ही नहीं, बल्कि यह आम बात है।

इस लक्ष्य से आप महंगाई को 100 गुना या उससे अधिक पीछे छोड़ेंगे और आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने की स्थिति में ला खड़ा करेगा।

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